हिंदी की वर्ण तालिका में 52
वर्ण होते हैं, वर्णो को दो प्रकारों में विभाजित किया जाता है: स्वर तथा व्यंजन।
- स्वर दो प्रकार के होते हैं: ह्रस्व तथा दीर्घ ।
- इसी प्रकार व्यंजन ५ प्रकार के होते हैं: स्पर्श, अन्तः स्थ, ऊष्म, आगत, संयुक्त।
स्वर :
- बग़ैर किसी वर्ण की सहायता से उच्चारण होने वाली वर्णात्मक ध्वनि या शब्द (जैसे—अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) को स्वर कहते हैं।
- जैसा की हम जानते हैं की स्वर दो प्रकार के होते हैं: ह्रस्व तथा दीर्घ
- ह्रस्व स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में कम-से-कम समय लगता हैं उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं। ये चार हैं- अ, इ, उ, ऋ। इन्हें मूल स्वर भी कहते हैं।
- दीर्घ स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों से दुगुना समय लगता है उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर के उदाहरण है।
व्यंजन:
जिन वर्णों के पूर्ण उच्चारण के लिए स्वरों की सहायता ली जाती है वे व्यंजन कहलाते हैं। अर्थात् व्यंजन बिना स्वरों की सहायता के बोले ही नहीं जा सकते। ये संख्या में ४१ होते हैं। इसके निम्नलिखित पांच भेद हैं:
- स्पर्श व्यंजन: इन्हें पाँच वर्गों में रखा गया है और हर वर्ग में पाँच-पाँच व्यंजन हैं। हर वर्ग का नाम पहले वर्ग के अनुसार रखा गया है| जैसे:
कवर्ग- क् ख् ग् घ् ङ्
चवर्ग- च् छ् ज् झ् ञ्
टवर्ग- ट् ठ् ड् ढ् ण् (ड़् ढ़्)
तवर्ग- त् थ् द् ध् न्
पवर्ग- प् फ् ब् भ् म्
- अंतःस्थ व्यंजन: ये निम्नलिखित चार हैं- य् र् ल् व्
- ऊष्म व्यंजन: ये निम्नलिखित चार हैं- श् ष् स् ह्
- आगत व्यंजन: हिन्दी में अंग्रेज़ी तथा उर्दू भाषा के शब्द निरन्तर प्रवेश कर रहे हैं, किन्तु उनका शुद्ध उच्चारण करने के लिए हिन्दी में लिपि चिह्न नहीं हैं।इसलिए उनको शुद्ध रूप में लिखने के लिए हिन्दी के व्यंजनों के नीचे एक बिंदु लगाया जाता है। यह जो नीचे बिंदु लगाया जाता है यही नुक्ता कहलाता है। ये निम्नलिखित दो है- ‘ज़’ तथा ‘फ़’।
- संयुक्त व्यंजन: वैसे तो जहाँ भी दो अथवा दो से अधिक व्यंजन मिल जाते हैं वे संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं, किन्तु देवनागरी लिपि में संयोग के बाद रूप-परिवर्तन हो जाने के कारण इन तीन को गिनाया गया है। ये दो-दो व्यंजनों से मिलकर बने हैं। जैसे-क्ष=क्+ष अक्षर, ज्ञ=ज्+ञ ज्ञान, त्र=त्+र नक्षत्र कुछ लोग क्ष् त्र् और ज्ञ को भी हिन्दी वर्णमाला में गिनते हैं, पर ये संयुक्त व्यंजन हैं।
उच्चारण के हिसाब से स्वरों का वर्गीकरण:
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वर्ग का नाम
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उच्चारण स्थान
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कण्ठ्य
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कंठ
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अ, आ
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तालव्य
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तालु
(मुँह के भीतर की छत का पिछला भाग)
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इ, ई
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मूर्धन्य
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मूर्धा
(मुँह के भीतर की छत का अगला भाग)
कंठ+तालु
ओष्ठ+कंठ
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ऋ
ए, ऐ
ओ, औ
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ओष्ठ्य
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ओंठ
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ऊ, उ
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उच्चारण के हिसाब से व्यंजनों का वर्गीकरण:
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वर्ग का नाम
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उच्चारण का स्थान
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कण्ठ्य
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कंठ
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क ,ख ,ग, घ, ड़
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तालव्य
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तालु
(मुँह के भीतर की छत का पिछले भाग)
(मुँह के भीतर की छत का अगला भाग)
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च, छ, ज, झ, ञ, ज़
श, य
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मूर्धन्य
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मूर्धा
मुँह के भीतर की छत का अगला भाग
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ट, ठ, ड, ढ, ण, ढ़, ष
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दन्त्य
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ऊपरी दांतों के निकट से
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त, थ, द, ध, न
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ओष्ठ्य
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दोनों ओंठो से
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प, फ, ब, भ, म, फ़
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वत्सर्य
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दन्त+मसूड़ा
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स, र, ल
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दन्तोष्ठ्य
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ऊपर के दांत+निचला ओंठ
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व
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स्वरयंत्रीय
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स्वर यंत्र (कंठ के भीतर से)
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ह
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